फूलों के रंग
मनुष्य प्राचीन काल से प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करता आ रहा है। प्राचीन समय मे सिंथेटिक रंग उपलब्ध नहीं थे। फूल रंगो के मुख्य स्रोत थे। इस लेख मे मेरा यह बताने का इरादा नहीं है कि रंगों को फूलो से कैसे बनाया गया, बल्कि यह बताने की कोशिश की गयी है कि कैसे फूलों के रंग हमारे जीवन के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं।
आपने विभिन्न फूलों को देखा हैं । फूलों में आपको रंगोंकी एक पूरी श्रृंखला मिलती है -सफ़ेद से लेकर काले तक। कुछ फूल एक रंग के होते हैं जैसे लाल, पीले,, गुलाबी ,नीले जबकि कई फूलो में रंग इतने खूबसूरती से मिश्रित होते हैं कि कोई भी चित्रकार ऐसी चित्रकारी कर ही नहीं सकता है। यहां आप अपना पहला अवलोकन करके कह सकते हैं कि - सभी रंग फूलों पर ही अच्छे लगते हैं या सभी रंगो के फूल अच्छे लगते हैं , पर हम एक रंग से नफरत करते है या हमें सभी रंग पसंद हैं बस एक रंग नहीं । उदाहरण के लिए, आप पीले रंग को नापसंद करते हैं। लेकिन अगर आप पीले रंग का फूल उठाते हैं, तो आप इसे नापसंद नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि रंग, फूल की संरचना और बनावट को एक साथ इतनी अच्छी तरह से मिला देता है कि वह खुद उससे अलग नहीं रहता बल्कि फूल में पूरी तरह से विलीन हो जाता है। मेरे कहने का मतलब यह है कि अगर आप पीले रंग का फूल उठाते हैं, तो आपका ध्यान केवल उसके रंग पर नहीं , बल्कि उसके स्पर्श, आकृति, सुगंध और फूल की समरूपता पर जायेगा ,जहाँ रंग ने फूल को सुंदर बनाने के लिए खुद को अन्य गुणों के साथ मिला लिया है या हम कह सकते हैं कि रंग भी फूल के अन्य गुणों में रम गया।
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Nice
ReplyDelete👍👍welldone
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteSo true
ReplyDeleteअति सुंदर सराहनीय प्रयास
ReplyDeletePresented beautifully
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